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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c17.3

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c17.3

Language
Hindi

c17.3

पश्चिमी लिपि का प्रचार गुजरात, काठियावाड़, नासिक, खानदेश तथा सतारा ज़िलों में, हैदराबाद राज्य के कुछ अंशों और कोंकण आदि में ई. स. की पांचवीं से नवीं शताब्दी तक रहा (देखो, ऊपर पृष्ठ ४३). ई. स. की पांचवीं शताब्दी के आसपास इसका कुछ कुछ प्रचार राजपूताना, मध्यभारत और मध्यप्रदेश में भी पाया जाता है (देखो, ऊपर पृ. ६०, टिप्पण २, ३, ४). यह लिपि गुप्तों२, वलभी के राजाओं३, भड़ौच के गुर्जरवंशियों४, बादामी और गुजरात के चालुक्यों५, त्रैकूटकों६, राष्ट्रकूटों७, गुजरात के कलचुरियों८ आदि९ राजवंशों के कितने एक शिलालेखों या दानपत्रों में तथा साधारण पुरुषों के लेखों में मिलती है. उत्तरी शैली की लिपियों के पड़ोस की लिपि होने से इसपर उनका प्रभाव पड़ा है.