भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c17.31
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c17.31
- Language
- Hindi
c17.31
यह लिपिपत्र पालीताना से मिले हुए गारुलक सिंहादित्य के गुप्त सं. २५५ ( ई. स. ५७४ ) के दानपत्र३ और वलभी के राजा शीलादित्य (पांचवें) के गुप्त सं. ४०३ ( ई. स. ७२२ ) के दान-पत्र४ से तय्यार किया गया है. शीलादित्य के दानपत्र में ‘इ’ के चार टुकड़े किये हैं, जिनमें से नीचे की दो रेखाएं तो दो बिंदियों के स्थानापन्न हैं और ऊपर की दो तिरछी रेखाएं, सीधी आड़ी लकीर के खमदार रूप के ही हिस्से हैं जो जुड़े हुए होने चाहिये थे. ‘ए’ का रूप विलक्षण बना है परंतु वह लिपिपल ३७वें में दिये हुए ‘ए’ का त्वरा से लिखा हुआ विकृत रूप ही है. ‘ऐ’ में ऊपर की खमदार आड़ी रेखा का खम के पूर्व का हिस्सा ‘ए’ के अग्रभाग की बाईं ओर जुड़नेवाली रेखा का गोलाईदार रूप ही है और बाकी का भाग ‘ए’ का है. ‘ल्ल’ में ऊपर का आधा भाग ‘ल’ (दूसरे) का रूप है और नीचे का आधा भाग ‘ल’ (तीसरे) का कुछ विकृत रूप है. इस तरह दो प्रकार के ‘ल’ मिलकर यह रूप बना है.