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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c19.71

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c19.71

Language
Hindi

c19.71

यह लिपिपत्र दोनेपूंड़ि से मिले हुए पीठापुरी के नामयनायक के शक सं. १२५६ (ई. स. १३३७) के दानपत्र२, वनपल्ली से मिले हुए अन्नवेम के दानपत्र३ तथा कोंडवीडु से मिले हुए गणदेव के शक सं. १३७७ के दानपत्र४ से तय्यार किया गया है. वनपल्ली और कोंडवीडु के दानपत्रों से मुख्य मुख्य अक्षर दिये गये हैं. दोनेपूंड़ि के दानपत्र के क, ञ ('ज्ञ' में), द, प, फ, व और ह में थोड़ा सा परिवर्तन होने से वर्तमान कनड़ी और तेलुगु लिपियों के वे ही अक्षर बने हैं. 'फ' के नीचे जो उलटे अर्धवृत्त का सा चिह्न लगा है वह 'फ' और 'प' का अंतर बतलाने के लिये ही है. पहिले उसका स्थानापन्न चिह्न 'फ' के भीतर दाहिनी ओर की खड़ी लकीर के साथ सटा रहता था (देखो, लिपिपत्र ४८, ४६, ५०) और वर्तमान कनड़ी तथा तेलुगु लिपियों में उसका रूप शंकु जैसी आकृति की खड़ी लकीर में बदल कर अक्षर के नीचे लगाया जाता है. अनुस्वार अक्षर के ऊपर नहीं किंतु आगे लगाया है. ई. स. की १४ वीं शताब्दी के पीछे भी इस लिपि में और थोड़ा सा अंतर पड़ कर वर्तमान कनड़ी और तेलुगु लिपियां बनी हैं. यह अंतर लिपि-पत्र ८० में दी हुई लिपियों का लिपिपत्र ५१ से मिलान करने पर स्पष्ट होगा.