भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c21.21
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c21.21
- Language
- Hindi
c21.21
यह लिपिपत्र गंगवंशी राजा वज्रहस्त के पर्लाकिमेडी के दानपत्र१ से तय्यार किया गया है. इस दानपत्र का लेखक उत्तरी और दक्षिणी शैली की भिन्न भिन्न लिपियों का ज्ञाता रहा हो और उसने इसमें अपने लिपिसंबंधी विशेष ज्ञान का परिचय देने के विचार से ही भिन्न भिन्न लिपियों का मिश्रण जान बूझ कर किया हो ऐसा अनुमान होता है. प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता डॉ. कीलहॉर्न ने इस दानपत्र का संपादन करते समय इसके अक्षरों की गणना कर लिखा है कि प्रायः ७३० अक्षरों में से ३२० नागरी में लिखे हैं और ४१० दक्षिणी लिपियों में२. प्राचीन लिपियों के सामान्य बोधवाले को भी इस लिपिपत्र के मूल अक्षरों को देखते ही स्पष्ट हो जायगा कि उनमें अ (पहिला), आ (पहिला), ई, उ, ऋ, क (पहिले तीन रूप), ग (पहिला), च (पहिला), ज (पहिला), ड (दूसरा), ण (पहिला), त (पहिला), द (पहिला व दूसरा), न (पहिला), प (पहिला), भ (पहिला), म (पहिला), र (पहिला व दूसरा), ल (पहिला), व (पहिला), श (पहिला व दूसरा), ष (पहिला), स (पहिला) और ह (पहिला व दूसरा) नागरी के ही हैं. दक्षिणी शैली के अक्षरों में से अधिकतर तेलुगु-कनड़ी हैं और ग्रंथ लिपि के अक्षर कम हैं जैसे कि 'ग' (पांचवां), ण (चौथा और पांचवां) और म (दूसरा).