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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c22.17

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c22.17

Language
Hindi

c22.17

यह लिपिपत्र राजेन्द्रचोल(प्रथम) के तिरुमलै के चट्टान पर खुदे हुए लेख३, पगन (बर्मा में) से मिले हुए वैष्णव लेख४, विजयनगर के राजा विरूपाक्ष के शोरेक्कावुर के शक सं. १३०८ (ई. स. १३८७) के दानपत्र५ और महामंडलेश्वर वालककायम६ के शक सं. १४०३ (ई. स. १४८२) के जंबुकेश्वर के शिलालेख७ से तय्यार किया गया है. तिरुमलै के चट्टान के लेख का ‘ई’ उत्तरी शैली की ब्राह्मी का है क्योंकि उसकी दो बिंदियों के बीच की खड़ी लकीर का नीचे का अंश बाईं ओर मुड़ कर ऊपर की तरफ़ बढ़ा हुआ नहीं है. यह ‘ई’ प्रायः वैसा ही है जैसा कि मथुरा से मिले हुए संवत् ७६ के लेख८ में मिलता है, और महाक्षत्रप ईश्वरदत्त के सिक्कों (लिपिपत्र १०) और अमरावती के लेखों (लिपिपत्र १२) के ‘ई’ से भिन्न है क्योंकि उनमें खड़ी लकीर का नीचे का अंश बाईं ओर ऊपर को मुड़ा हुआ मिलता है. विरूपाक्ष के दानपत्र और वालककामय के लेख के अक्षरों में से अधिकतर वर्तमान तामिळ अक्षरों से मिलते जुलते हो गये हैं.