भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c22.8
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c22.8
- Language
- Hindi
c22.8
यह लिपिपत्र पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन के कूरम के दानपत्र१ तथा उसी वंश के राजा नंदिवर्मन् के कशाक्कूड़ि२ और उदयेंदिरम्३ के दानपत्रों के अंत के तामिळ अंशों से तैयार किया गया है. कूरम के दानपत्न के अक्षरों में से अ, आ, इ, उ, ओ, च, ज, ए, त, न, प, य और व (पहिला) ग्रंथ लिपि के उक्त अक्षरों की शैली के ही हैं. ‘अ’ और ‘आ’ में इतना ही अंतर है कि उन की खड़ी लकीरों को ऊपर की तरफ दोहराया नहीं है. इस अंतर को छोड़कर इस ताम्रपत्र के ‘अ’ और लिपिपत्र ५२ में दिये हुए मामल्लपुरम् के लेखों के ‘अ’ (दूसरे) में बहुत कुछ समानता है. क, ट, र और व (दूसरा) उत्तरी शैली की ब्राह्मी लिपि से मिलते हुए हैं. कशाक्कूड़ि के दानपत्र का ‘अ’ कूरम के दानपत्र के ‘अ’ की ग्रंथि को लंबा करने से बना है. उदयेंदिरम् के दानपत्र में हलंत और सस्वर व्यंजन में कोई भेद नहीं है.