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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.2

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.2

Language
Hindi

c25.2

प्राचीन शिलालेखों, दानपत्रों, सिक्कों तथा हस्तलिखित पुस्तकों के देखने से पाया जाता है कि लिपियों की तरह प्राचीन और अर्वाचीन अंकों में भी अंतर है. यह अंतर केवल उनकी आकृति में ही नहीं किंतु अंकों के लिखने की रीति में भी है. वर्तमान समय में जैसे १ से ६ तक अंक और शून्य इन १० चिह्नों से अंकविद्या का संपूर्ण व्यवहार चलता है वैसे प्राचीन काल में नहीं था. उस समय शून्य का व्यवहार ही न था और दहाइयों, सैकड़े, हज़ार आदि के लिये भी अलग चिह्न थे. अंकों के संबंध में इस शैली को ‘प्राचीन शैली’ और जिसमें शून्य का व्यवहार है उसको ‘नवीन शैली’ कहेंगे.