भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.32
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.32
- Language
- Hindi
c25.s1.32
प (५) से बिलकुल मिलते हुए हैं. कभी कभी अक्षरों की नांई अंकों के भी सिर बनाने से उनकी आकृतियां कहीं कहीं अक्षरों सी बनती गई१. पीछे से अंकचिह्नों को अक्षरों के से रूप देने की चाल बढ़ने लगी और कितने एक लेखकों ने और विशेषकर पुस्तकलेखकों ने उनको सिरसहित अक्षर ही बना डाला जैसा कि बुद्धगया से मिले हुए महानामन् के शिलालेख२, नेपाल के कितने एक लेखों३ तथा प्रतिहारवंशियों के दानपत्रों४ से पाया जाता है. तो भी १, २, ३, ५०, ८० और ९० तो अपने परिवर्तित रूपों में भी प्राचीन रूपों से ही मिलते जुलते रहे और किन्हीं अक्षरों में परिणत न हुए.