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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s1.48

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.48

Language
Hindi

c25.s1.48

३ मलयालम् लिपि के पुस्तकों में बहुधा अब तक इस प्रकार अक्षरों में अंक लिखने की रीति चली आती है. ऍच. गंडर्ट ने अपने मलयालम् भाषा के व्याकरण (दूसरे संस्करण) में अक्षरों से बतलाये जाने वाले अंकों का ब्योरा इस तरह दिया है:— १=न. २=न्न. ३=न्य. ४=क्र. ५=झ. ६=हा (ह). ७=ग्र. ८=प्र. ६=द्रे (?). १०=म. २०=थ. ३०=ल. ४०=प्त. ५०=व. ६०=च. ७०=रू (त्रु). ८०=च. ६०=ण. १००=ञ. (ज. रॉ. ए. सो; ई. स. १८६६, पृ. ७६०). इनमें भी प्राचीन अक्षरों के पढ़ने में ग़लती होना पाया जाता है जैसे कि ६ का सूचक ‘हा’, ‘फ’ को ‘ह’ पढ़ने से ही हुआ है. उस लिपि में ‘फ’ और ‘ह’ की आकृति बहुत मिलती हुई है (देखो, लिपिपत्र ८२). ऐसे ही और भी अशुद्धियां हुई हैं.