भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s1.80
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s1.80
- Language
- Hindi
c25.s1.80
पीछे से मिसरवालों ने किसी विदेशी सरल अंकक्रम को देख कर अथवा अपनी बुद्धि से अपने भद्दे हिएरोग्लिफिक क्रम को सरल करने के लिये भारतीय अंकक्रम जैसा नवीन क्रम बनाया, जिसमें १ से ६ तक के लिये ६, १० से ६० तक की दहाइयों के लिये ६, और १०० तथा १००० के लिये एक एक चिह्न स्थिर किया. इस अंकक्रम को 'हिएरेटिक्' कहते हैं और इसमें भी अंक दाहिनी ओर से बाईं ओर लिखे जाते हैं. हिएरेटिक और भारतीय अंकों की आकृतियों का परस्पर मिलान किया जावे तो अंकों के २० चिह्नों में से केवल ६ का चिह्न दोनों में कुछ मिलता हुआ है; बाकी किसी में समानता नहीं है. दूसरा अंतर यह है कि हिएरेटिक अंकों में २०० से ४०० तक के अंक १०० के अंक की बाईं तरफ़ क्रमशः १ से ३ खड़ी लकीरें रखने से बनते हैं परंतु भारतीय अंकों में २०० और ३०० के लिये क्रमशः १ और २ आड़ी लकीरें १०० के अंक के साथ दाहिनी ओर जोड़ी जाती हैं और ४०० के लिये वैसी ही ३ लकीरें १०० के अंक के साथ जोड़ी नहीं जातीं किंतु ४ का अंक ही जोड़ा जाता है. तीसरा अंतर यह है कि हिएरेटिक में २००० से ४००० बनाने के लिये १००० के अंक के कुछ विकृत रूप को आड़ा रख कर उसके ऊपर क्रमशः २ से ४ तक खड़ी लकीरें जोड़ी जाती हैं परंतु भारतीय अंकों में २००० और ३००० के अंक तो १००० के अंक की दाहिनी ओर क्रमशः १ और २ आड़ी लकीरें जोड़ने से बनते हैं परंतु ४००० के लिये वैसी ही तीन लकीरें नहीं किंतु ४ का अंक ही जोड़ा जाता है (देखो, पृ. ११३ में दिया हुआ नक्शा.)