भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c27.28
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c27.28
- Language
- Hindi
c27.28
तेलुगु और कनड़ी लिपियां—ये दोनों लिपिपत्र ४३ से ५१ में दी हुई प्राचीन तेलुगु-कनड़ी लिपि से निकली हैं. इनके अधिकतर अक्षर परस्पर मिलते जुलते ही हैं. केवल उ, ऊ, ऋ, क, त, स और ह में अंतर है. इन दोनों लिपियों में 'ए' और 'ओ' के ह्रस्व तथा दीर्घ, दो दो भेद हैं. नागरी लिपि में यह भेद न होने से हमने दीर्घ 'ए' और दीर्घ 'ओ' के लिये नागरी के 'ए' और 'ओ' के ऊपर आड़ी लकीर लगा कर उनका भेद बतलाया है. तेलुगु लिपि का प्रचार मद्रास इहाते के पूर्वी समुद्रतट के हिस्से, हैदराबाद राज्य के पूर्वी तथा दक्षिणी हिस्सों एवं मध्यप्रदेश के सब से दक्षिणी हिस्से में है. कनड़ी लिपि का प्रचार बहुधा सारे मैसोर राज्य, कुर्ग, नीलगिरि प्रदेश, मैसोर के निकट के पश्चिमी घाट प्रदेश और बंबई इहाते के दक्षिणी कोने ( बीजापुर, बेलगांव तथा धारवाड़ जिलों और उत्तरी कनड़ा प्रदेश ) में है. 'तेलुगु' नाम की उत्पत्ति संभवतः 'त्रिलिंग' ( तिलिंग, तिलिंगाना ) देश के नाम पर से हो; और कनड़ी की कन्नड ( प्राचीन 'कर्णाट' ) देश के नाम से है.