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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c27.37

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c27.37

Language
Hindi

c27.37

**तामिळ लिपि**—यह लिपि लिपिपत्र ६०-६२ में दी हुई प्राचीन तामिळ लिपि से बनी है. ‘तामिळ’ शब्द की उत्पत्ति देश और जातिसूचक ‘द्रमिळ’ (द्रविड़) शब्द से हुई है. तामिळ भाषा आर्य लोगों की संस्कृत भाषा से बिलकुल भिन्न है तो भी उसके अक्षर आर्य लिपियों से ही लिये गये हैं (देखो, ऊपर पृ. ४४, ६५). इस लिपि में व्यंजन वर्ण केवल १८ होने से संस्कृत भाषा इस में लिखी नहीं जा सकती इसलिये संस्कृत शब्दों का जहां प्रयोग होता है वहां वे ग्रंथ लिपि में लिखे जाते हैं. इसमें ‘ए’ और ‘ओ’ के दो दो रूप अर्थात् ह्रस्व और दीर्घ मिलते हैं (देखो, ऊपर पृ. ६७). इसका प्रचार मद्रास इहाते के, मद्रास से कुछ ऊपर तक के, दक्षिणपूर्वी हिस्से अर्थात् उत्तरी आर्कट, चिंग्लेपट, दक्षिणी आर्कट, सलेम्, कोईम्बाटोर, त्रिचिनापोली, तंजौर, मदुरा और तिन्नवेल्लि ज़िलों एवं त्रावनकोर राज्य के दक्षिणी अंश (त्रिवेंद्रम् से नीचे नीचे) और पदुदुकोटा राज्य में है.