भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c28.2
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c28.2
- Language
- Hindi
c28.2
भारतवर्ष की नागरी, शारदा, बंगला, तेलुगु, कनड़ी, ग्रंथ, तामिळ आदि समस्त वर्तमान (उर्दू को छोड़ कर) लिपियों का मूल ‘ब्राह्मी’ लिपि है, परंतु ये लिपियां अपनी मूल लिपि से इतनी भिन्न हो गई हैं कि जिनको प्राचीन लिपियों से परिचय नहीं हैं वे सहसा यह स्वीकार भी न करेंगे कि ये सब लिपियां एक ही मूल लिपि से निकली हैं. लेखनप्रवाह सदा एक ही स्रोत में नहीं बहता किंतु लेखकों की लेखनरुचि के अनुसार समय के साथ भिन्न भिन्न मार्ग ग्रहण करता रहता है; इसीसे सब देशों की प्राचीन लिपियां पलटती रही हैं. हमारे यहां की भिन्न भिन्न लिपियां एक ही मूल स्रोत की शाखा प्रशाखाएं हैं जिनके विकास के मुख्य कारण ये हैं—