भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s1.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s1.1
- Language
- Hindi
c30.s1.1
ताड़पत्र—ताड़ (ताल, ताली) नामक वृक्ष की दो भिन्न जातियों के पत्ते हैं. ताड़ के वृक्ष दक्षिण में तथा समुद्रतट के प्रदेशों में विशेष रूप से और राजपूताना, पंजाब आदि में कम होते हैं. टिकाउ होने तथा थोड़े मूल्य में बहुत मिल आने के कारण प्रारंभिक काल से१ ही ताड़ के पत्ते पुस्तक आदि लिखने के काम में आते थे. ताड़ के पत्ते बहुत बड़े बड़े होते हैं; उन्हें संधियों में से काट कर, अधिक लंबी परंतु चौड़ाई में एक से चार इंच तक की ही, पट्टियां निकाली जाती हैं जिनमें से जितनी लंबाई का पत्ना बनाना हो उतना काट लेते हैं. पुस्तक लिखने के लिये जो ताड़पत्र काम में आते थे उनको पहिले सुखा देते थे, फिर उनको पानी में उबालते या भिगो रखते थे. पीछे उनको फिर सुखा कर शंख, कौड़े या चिकने पत्थर आदि से घोटते थे. मामूली कामों के लिये जो पत्ते पहिले काम में लाये जाते थे या अब लाये जाते हैं वे इस तरह तय्यार नहीं किये जाते. कश्मीर और पंजाब के कुछ अंश को छोड़ कर बहुधा सारे भारतवर्ष में ताड़पत्र का बहुत प्रचार था. पश्चिमी और उत्तरी भारतवाले उनपर स्याही से लिखते थे परंतु दक्षिणवाले