भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s1.4
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s1.4
- Language
- Hindi
c30.s1.4
अब तक मिले हुए स्याही से लिखे ताड़पत्र के पुस्तकों में सब से पुराना एक नाटक का कुछ त्रुटित अंश है जो ई. स. की दूसरी शताब्दी के आस पास का है१. मि. मॅकार्टने के काशगर से भेजे हुए ताड़पत्रों के टुकड़े ई. स. की चौथी शताब्दी के हैं२. जापान के होरियूज़ि के मठ में रक्खे हुए 'प्रज्ञापारमिताहृदयसूत्र' तथा 'उष्णीषविजयधारणी' नामक बौद्ध पुस्तक३, जो मध्य भारत से वहां पहुंचे थे, ई. स. की ६ठी शताब्दी के आस पास के लिखे हुए हैं. नेपाल के ताड़पत्र के पुस्तकसंग्रह में ई. स. की ७वीं शताब्दी का लिखा हुआ 'स्कंदपुराण'४, कैंब्रिज के संग्रह में हर्ष संवत् २५२ (ई. स. ८५६) का लिखा हुआ 'परमेश्वरतंत्र'५ और नेपाल के संग्रह में नेवार सं. २८ (ई. स. ६०६-७)६ का लिखा हुआ 'लंकावतार' नामक पुस्तक है. ई. स. की ११ वीं शताब्दी और उसके पीछे के तो अनेक ताड़पत्र के पुस्तक गुजरात, राजपूताना, नेपाल आदि के एवं यूरोप के कई पुस्तकसंग्रहों में रक्खे हुए हैं. दक्षिणी शैली के अर्थात् लोहे की तीक्ष्ण अग्रभागवाली शलाका से दबा कर बनाये हुए अक्षरवाले पुस्तक ई. स. की १५ वीं शताब्दी से पहिले के अब तक नहीं मिले जिसका कारण दक्षिण की उष्ण हवा से उनका शीघ्र नष्ट होना ही है.