भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s16.4
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s16.4
- Language
- Hindi
c30.s16.4
भूर्जपत्र (भोजपत्र) पर लिखने की स्याही बादाम के छिलकों के कोयलों को गोमूत्र में उबाल कर बनाई जाती थी१. भूर्जपत्र उष्ण हवा में जल्दी खराब हो जाते हैं परंतु जल में पड़े रहने से वे बिलकुल नहीं बिगड़ते इस लिये कश्मीरवाले जब मैले भूर्जपत्र के पुस्तकों को साफ़ करना चाहते हैं तब उनको जल में डाल देते हैं जिससे पत्रों एवं अक्षरों पर का मैल निकल कर वे फिर स्वच्छ हो जाते हैं और न स्याही हलकी पड़ती है और न फैलती है. भूर्जपत्र पर लिखे हुए पुस्तकों में कहीं अक्षर आदि अस्पष्ट हों तो ऐसा करने से वे भी स्पष्ट दीखने लग जाते हैं.