भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s3.10
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s3.10
- Language
- Hindi
c30.s3.10
४ ज. ए. सो. बंगा; जि. ६६, पृ. २१३-२६०. इन पुस्तकों में से जो मध्य एशिया की गुप्तकाल की लिपि में हैं वे तो मध्य एशिया के ही लिखे हुए हैं, परंतु कितने एक जो भारतीय गुप्त लिपि के हैं (सेट ७, संख्या ३ के a, b, c, e, f टुकड़े; संख्या ५-८, ११. सेट १३, १५, १६) उनका भारतवर्ष से ही वहां पहुंचना संभव है जैसे कि होर्युज़ी के मठ के ताड़पत्र के और मि० बावर के भोजपत्र के पुस्तक यहीं से गये हुए हैं. बूलर आदि कितने एक यूरोपियन विद्वानों ने युरोप की नांई भारतवर्ष में भी काग़ज़ों का प्रचार मुसलमानों ने किया ऐसा अनुमान कर मध्य एशिया से मिले हुए भारतीय गुप्त लिपि के पुस्तकों में से एक का भी यहां से वहां पहुंचना संदेहसहित नहीं माना परंतु थोड़े समय पूर्व डॉ० सर ऑरल स्टाइन को चीनी तुर्केस्तान से चींथड़ों के बने हुए ई. स. की दूसरी शताब्दी के जो कागज़ मिले उनके आधार पर डा० बार्नेट ने लिखा है कि 'यह संभव है कि मुग़लों (? मुसलमानों) के आने से बहुत पहिले हिंदुस्तान में काग़ज़ का प्रचार होगा परंतु उसका उपयोग कम होता था (बा; ऐं. इं; पृ. २२६-३०).