भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s4.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s4.1
- Language
- Hindi
c30.s4.1
रूई का कपड़ा जिसको 'पट' कहते हैं प्राचीन काल से लिखने के काम में कुछ कुछ आता था और अब तक भी आता है. उसे भी कागजों की तरह पहिले आटे की पतली लेई लगा कर सुखाते हैं, फिर शंख आदि से घोट कर चिकना बनाते हैं तब वह लिखने के काम में आता है. जैनों के मंदिरों की प्रतिष्ठा के समय अथवा उत्सवों पर रंगीन चावल आदि अन्नों से जो भिन्न भिन्न मंडल बनाये जाते हैं उनके पटों पर बने हुए रंगीन नक्शों का संग्रह जैन मंदिरों या उपासरों में पुस्तकों के साथ जगह जगह मिलता है५. ब्राह्मणों के यहां 'सर्वतोभद्र,' 'लिंगतोभद्र' आदि