भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s8.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s8.1
- Language
- Hindi
c30.s8.1
ताड़पत्र, भूर्जपत्र (भोजपत्र) या काग़ज़ पर लिखा हुआ लेख बहुत काल तक बचा नहीं रहता इस लिये जिस घटना की यादगार चिरस्थायी करना होता उसको लोग पत्थर पर खुदवाते थे और अब भी खुदवाते हैं. ऐसे लेख चट्टान, स्तंभ, शिला, मूर्तियों के आसन या पीठ, पत्थर के पात्रों या उन- के ढक्कनों पर खुदे हुए मिलते हैं. पत्थर पर खुदे हुए लेखों को 'शिलालेख,' और जिनमें राजाओं आदि का प्रशंसायुक्त वर्णन होता है उनको 'प्रशस्ति' कहते हैं. जिस आधार पर लेख खुदवाना होता वह यदि समान और चिकना न हो तो पहिले टांकियों से छील कर उसे समान बनाते फिर पत्थर आदि से घोंटकर वह चिकना बनाया जाता था१. जिस आशय का लेख लिखना होता उसकी रचना कोई कवि, विद्वान्, राजकीय अधिकारी१० या अन्य पुरुष करता. फिर सुंदर अक्षर लिखनेवाला लेखक२ एक एक अथवा दो दो पंक्तियां स्याही से पत्थर पर लिखता और उनको कारीगर (सूत्रधार) खोदता जाता था. इस प्रकार क्रमशः सारा पत्थर खोदा जाता४. इस प्रकार से तैयार किये जाते हुए शिलालेख मैंने स्वयं देखे हैं. लिखने के पूर्व पंक्तियां सीधी लाने के लिये यदि पत्थर अधिक लंबा होता तो सूत की पतली डोरी को गेरू में भिगो कर उससे पंक्तियों के निशान बनाते, जैसे कि लकड़ी के लट्ठे को चीर कर तख्ते निकालनेवाले खाती लोग लट्ठे पर बनाते हैं, और पत्थर कम लंबाई का होता तो गज़ या लकड़ी की पट्टी रख कर उसके सहारे टांकी आदि से लकीर का निशान बना लेते. मंदिर, बावड़ी आदि की भींतों में लगाये जानेवाले लेख पत्थर की छोटी बड़ी पट्टियों (शिलाओं) पर खुदवाये जाकर बहुधा ताकों में, जो पहिले बना लिये जाते थे, लगाये जाते थे. ऐसे लेखों के चारों ओर पुस्तकों के पन्नों की नांई हाशिया छोड़ा जाता था. कभी कभी खोदे जानेवाले स्थान के चारों ओर लकीरें५ खुदी हुई मिलती हैं. कभी वह स्थान पाव इंच से एक इंच या उससे भी अधिक खोद कर हाशिये से नीचा६ किया हुआ मिलता है. अधिक सावधानी से खुदवाये हुए लेखों में कभी पत्थर की चटक उड़ गई तो उसमें पत्थर के रंग की मिश्रधातु भर कर उस स्थान को समान बनाते थे और यदि अक्षर का कोई अंश चटक के साथ उड़ जाता तो उसको पीछा उस धातु पर खोद लेते थे७. बहुधा शिलालेखों के प्रारंभ में और कभी अंत में कोई मंगल सूचक सांकेतिक चिह्न८, शब्द८ या किसी देवता के प्रणामसूचक
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- Vāsavadattā — Subandhu, Sanskrit