भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s8.14
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s8.14
- Language
- Hindi
c30.s8.14
३ इन विरामचिह्नसूचक लकीरों के लिये कोई निश्चित नियम नहीं था. कहीं बिना आवश्यकता के लगाई जाती थीं और कहीं आवश्यकता होने पर भी छोड़ दी जाती थीं. कहीं लेख की प्रत्येक पंक्ति के प्रारंभ में ( वेरावल से मिले हुए वलभी संवत् ६२७ के लेख में प्रत्येक पंक्ति के प्रारंभ में दो दो खड़ी लकीरें हैं; ऍ. इं; जि. ३, पृ. ३०६ के पास का सेट ) और कहीं अंत में भी ( अजमेर म्यूज़िअम में रक्खी हुई चौहानों के किसी ऐतिहासिक काव्य की शिलाओं में से पहिली शिला की बहुधा प्रत्येक पंक्ति के अंत में एक या दो खड़ी लकीरें हैं ) ऐसी लकीरें बिना आवश्यकता के मिलती हैं.