भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s10.5
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s10.5
- Language
- Hindi
c31.s10.5
६ संवत्सराणामधिके शते तु त्रिंशद्द्भिरन्यैरपि पञ्चभिरेव । शतौ दिने प्रौष्ठपदस्य पक्षे गुप्तप्रकाले गणनां विधाय ॥........वर्षशतेष्टाविंशे गुप्तानां काल....(गिरनार के पास के अशोक के लेखवाले चटान पर खुदे हुए स्कंदगुप्त के समय के लेख से. फ़्ली; गु. इं; पृ. ६०, ६१). मोरबी (काठियावाड़ में) से मिले हुए गुप्त संवत् ५८५ के दानपत्र में ‘पंचाशीत्या युतेतीते समानां शतपंचके । गोप्ते ददावदो नृपः सोपरागार्कंमंडले’ (इं. ऐं; जि. २, पृ. २५८). वर्षशते गुप्तानां सचतुःपंचाशदुत्तरे भूमिम् । शासति कुमारगुप्ते मासे ज्येष्ठे द्वितीयायाम् (सारनाथ से मिली हुई बुद्ध की मूर्ति के आसन पर का लेख. भं. कॉ. वॉ; पृ. २०३). गुप्तानां समतिक्रांते सप्तपंचाशदुत्तरे । शते समानां पृथिवीं बुधगुप्ते प्रशासति (सारनाथ से मिली हुई बुद्ध की मूर्ति के आसन पर का लेख. भं. कॉ. वॉ; पृ. २०३). परिव्राजक महाराज हस्तिन् के गुप्त संवत् १६१ के दानपत्र में ‘एकनवत्युत्तरेऽब्दशते गुप्तनृपराज्यभुक्तौ श्रीमत्ति प्रवर्द्धमानमहाचैत्रसंव(त्)त्सरे माघमासबहुलपंचदश्यान्तिथायाम्’ (फ्ली; गु. इं; पृ. १०७) लिखा मिलता है, और अल्बेरूनी अपने मूल अरबी पुस्तक में गुप्तकाल या ‘गुब्तकाल’ (=गुप्तकाल) ही लिखता है (फ्लो; गु. इं; भूमिका, पृ. २६, ३०).