भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s2.11
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s2.11
- Language
- Hindi
c31.s2.11
प्रारंभ कृष्ण के स्वर्गारोहण१ से अर्थात् भारत के युद्ध के पीछे माना है परंतु उसको पिछले विद्वानों ने स्वीकार नहीं किया. वराहमिहिर लिखता है कि युधिष्ठिर के राज्यसमय सप्तर्षि मघा नक्षत्र पर थे और उस राजा का शककाल ( संवत् ) २५२६ वर्ष रहा२ अर्थात् उसके संवत् के २५२६ वर्ष बीतने पर शक संवत् चला. इससे महाभारत के युद्ध का द्वापर के अंत में नहीं किंतु कलियुग संवत् के (३१७६-२५२६= ) ६५३ वर्ष व्यतीत होने पर होना मानना पड़ता है. कल्हण पंडित कश्मीर के राजाओं के राज्यसमय के विषय में लिखते हुए कहता है कि ‘द्वापर के अंत में भारत [ युद्ध ] हुआ इस दंतकथा से विमोहित हो कर कितने एक [ विद्वानों ] ने इन राजाओं का राज्यकाल गलत मान लिया है.......जब कलि के ६५३ वर्ष व्यतीत हुए तब कुरुपांडव हुए३’ अर्थात् भारत का युद्ध हुआ. यह कथन वराहमिहिर के उपर्युक्त कथन के अनुसार ही है.