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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s2.13

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s2.13

Language
Hindi

c31.s2.13

१ यदैव भगवद्विष्णोरंशो यातो दिवं द्विज । वसुदेवकुलोद्भूतस्तदैव कलिरागतः ( विष्णु पुराण, अंश ४, अध्याय २४, श्लोक ५४). विष्णोर्भगवतो भानुः कृष्णाख्योऽसौ दिवं गतः । तदा विशत्कलिर्लोकं पाप यद्रमते जनः ( भागवत, स्कंध १२, अध्याय २, श्लोक २६. ) महाभारत से पाया जाता है कि पांडवों ने विजयी होने के बाद १५ वर्ष तक तो राजा ( धृतराष्ट्र ) की आज्ञा के अनुसार सब कार्य किया. फिर भीम के वाग्बाण से खिन्न हो कर राजा विरक्त हुआ तब युधिष्ठिर स्वतंत्र राजा बना. फिर ३६ वें वर्ष कृष्ण और यादवों के स्वर्गवास की खबर आई तब परीक्षित को राज्यसिंहासन पर बिठला कर पांडवों ने द्रौपदी सहित महाप्रस्थान किया’ ( इं. पं; जि. ४०, पृ. १६३-६४ ). इस हिसाब से तो कृष्ण का स्वर्गारोहण, पांडवों का महाप्रस्थान, एवं पुराणों का कलियुग का प्रारंभ भारतयुद्ध से ( १५+३६= ) ५१ वर्ष बाद होना चाहिये.