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भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s21.3

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s21.3

Language
Hindi

c31.s21.3

कृत्तिका या रोहिणी पर उदय हो तो महाकार्तिक (कार्तिक); मृगशिर या आर्द्रा पर महामार्गशीर्ष (मार्गशीर्ष); पुनर्वसु या पुष्य पर महापोष; आश्लेषा या मघा पर माहमाघ; पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी या हस्त पर महाफाल्गुन; चित्रा या स्वाति पर महाचैत्र; विशाखा या अनुराधा पर महावैशाख; ज्येष्ठा या मूल पर महाज्येष्ठ; पूर्वाषाढ़ा या उत्तराषाढा पर महाआषाढ; श्रवण या धनिष्ठा पर महाश्रावण; शतभिषा, पूर्वाभाद्रपदा या उत्तराभाद्रपदा पर महाभाद्रपद और रेवती, अश्विनी या भरणी पर उदय हो तो महाआश्वयुज (आश्विन) संवत्सर कहलाता है१. इस चक्र में १२ वर्षों में एक संवत्सर क्षय२ हो जाता हैं. प्राचीन शिलालेख और दानपत्रों में बार्हस्पत्य संवत्सर दिये हुए मिलते हैं,३ जो सब ई. स. की ७ वीं शताब्दी के पूर्व के हैं. उसके पीछे इस का प्रचार सामान्य व्यवहार से उठ गया और केवल पंचांगों में वर्ष का नाम४ बतलाने में ही रह गया जो अब तक चला जाता है.