भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s22.3
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s22.3
- Language
- Hindi
c31.s22.3
२ १२ सौर वर्षों में ११ वार गुरु अस्त होकर फिर उदय होता है इसलिये १२ वर्ष में एक बार्हस्पत्य संवत्सर क्षय हो जाता है. जैसे कि पं. श्रीधर शिवलाल के वि. सं. १६६५ के पंचांग में 'वर्षनाम पौष' लिखा है परंतु १६६६ के पंचांग में 'वर्षनाम फाल्गुन' लिखा है जिससे माघ (महामाघ) संवत्सर क्षय हो गया.