भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s22.8
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s22.8
- Language
- Hindi
c31.s22.8
वराहमिहिर ने कलियुग का पहिला वर्ष विजय संवत्सर माना है परंतु ‘ज्योतिषतत्त्व’ के कर्त्ता ने प्रभव माना है. उत्तरी हिंदुस्तान में इस संवत्सर का प्रारंभ बृहस्पति के राशि बदलने से माना जाता है परंतु व्यवहार में चैत्र शुक्ला १ से ही उसका प्रारंभ गिना जाता है. उत्तरी विक्रम संवत् १६७५ के पंचांग में ‘प्रमोद’ संवत्सर लिखा है जो वर्ष भर माना जायगा, परंतु उसी पंचांग में यह भी लिखा है कि मेषार्क के समय (चैत्र शुक्ला ३ को) उसके १० मास, १६ दिन, ४२ घड़ी और १५ पल व्यतीत हो चुके थे और १ मास, १३ दिन, १७ घड़ी और ४५ पल बाकी रहे हैं१.