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भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s28.3

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s28.3

Language
Hindi

c31.s28.3

दक्षिण में इसका प्रचार बादशाह शाहजहां के समय हिजरी सन् १०४६ (ई. स. १६३६=वि. सं. १६६३) से हुआ और वहां इसका प्रारंभ उसी सन् से गिना गया जिससे उत्तरी और दक्षिणी फसली सनों के बीच करीब सवा दो वर्ष का अंतर पड़ गया. बंबई इहाते में इसका प्रारंभ शाहूर सन् की नांई सूर्य के मृगशिर नक्षत्र पर आने के दिन से (तारीख ५, ६ या ७ जून से) माना जाता है और महीनों के नाम मुहर्रम आदि ही हैं. मद्रास इहाते में इस सन् का प्रारंभ पहिले तो आडि (कर्क) संक्रांति से ही होता रहा परंतु ई. स. १८०० के आसपास से तारीख १२ जुलाई से माना जाने लगा और ई. स. १८५५ से तारीख १ जुलाई से प्रारंभ स्थिर किया गया है. दक्षिण के फसली सन् में ५९०-६१ जोड़ने से ई. स. और ६४७-४८ जोड़ने से वि. सं. बनता है.