भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s32.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s32.1
- Language
- Hindi
c31.s32.1
मंगि सन् बहुधा बंगाली सन् के समान ही है. अंतर केवल इतना ही है कि इसका प्रारंभ बंगाली सन् से ४५ वर्ष पीछे माना जाता है. इस लिये इसमें ६३८-३६ जोड़ने से ई. स. और ६६५-६६ जोड़ने से वि. सं. बनता है. इसका प्रचार बंगाल के चिटागांग ज़िले में है. अनुमान होता है कि वहांवालों ने बंगाल में फसली सन् का प्रचार होने से ४५ वर्ष पीछे उसको अपनाया हो. इस सन् के 'मंगि' कहलाने का ठीक कारण तो ज्ञात नहीं हुआ परंतु ऐसा माना जाता है कि आराकान के राजा ने ई. स. की ९ वीं शताब्दी में चिटागांग ज़िला विजय किया था और ई. स. १६६६ में मुगलों के राज्य में वह मिलाया गया तब तक वहां पर अराकानियों अर्थात् मगों का अधिकार किसी प्रकार बना रहा था. संभव है कि मगों के नाम से यह मंगि सन् कहलाया हो१.