भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s33.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s33.1
- Language
- Hindi
c31.s33.1
बादशाह अकबर के धर्मसंबंधी विचार पलटने पर उसने 'दीन-इ-इलाही' नाम का नया धर्म चलाने का उद्योग किया जिसके पीछे उसने 'इलाही सन्' चलाया. अब्दुल कादिर बदायूनी, जो अकबर के दरबार के विद्वानों में से एक था, अपनी 'मुंतख़बुत्तवारीख़' में लिखता है कि 'बादशाह अकबर ने हिजरी सन् को मिटा कर तारीख़-इ-इलाही नाम का नया सन् चलाया जिसका पहिला वर्ष बादशाह की गद्दीनशीनी का वर्ष था२.' वास्तव में यह सन् बादशाह अकबर के राज्यवर्ष २५ वें अर्थात् हिजरी सन् ९६२ (ई. स. १५८४) से चला परंतु पूर्व के वर्षों का हिसाब लगा कर इसका प्रारंभ अकबर की गद्दी नशीनी के वर्ष से मान लिया गया है. अकबर की गद्दीनशीनी तारीख़ २ रबीउस्सानी हिजरी सन् ९६३ (ई. स. १५५६ तारीख़ १४ फ़रवरी=वि. सं. १६१२ फाल्गुन कृष्णा ४) को हुई थी परंतु उसी दिन से इसका प्रारंभ माना नहीं गया किंतु उससे २५ दिन पीछे तारीख़ २८ रबीउस्सानी हि. स. ९६३ (ई. स. १५५६ तारीख़ ११ मार्च=वि. सं. १६१२ चैत्र कृष्णा अमावास्या) से, जिस दिन कि ईरानियों के वर्ष का पहिला महीना फरवरदीन लगा, माना गया है. इस सन् के वर्ष सौर हैं और महीनों३ तथा दिनों४ (तारीख़ों) के नाम ईरानी ही हैं. इस में दिनों (तारीखों) की संख्या नहीं किंतु १ से ३२ तक के दिनों के नियत नाम ही लिखे जाते थे.