भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s34.4
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s34.4
- Language
- Hindi
c31.s34.4
३ ग्रीकों की नांई रोमन लोगों में भी प्राचीन काल में कालगणना के लिये कोई सन् प्रचलित न था इस लिये पीछे से रोम नगर की स्थापना के वर्ष से सन् कायम किया गया, परंतु जिस समय यह सन् स्थिर किया गया उस समय रोम नगर को बसे कई शताब्दियां बीत चुकी थीं इस लिये वहां के इतिहास के भिन्न भिन्न पुस्तकों में रोम की स्थापना से जो सन् लिखा गया है उसका प्रारंभ एकसा नहीं मिलता. रोमन इतिहास का सब से प्राचीन लेखक फैबिअस् पिक्टर (ई. स. पूर्व २२०) ई. स. पूर्व ७४७ से; पोलिबियस (ई. स. पूर्व २०४-१२२) ७५० से; पोर्सिअस् कॅटो (ई. स. पूर्व २३४-१४६) ७५१ से; वेरिअस फ्लॅकस ७५२ से और टेरेंटिअस वैर्रो (ई. स. पूर्व ११६-२७) ई. स. पूर्व ७५३ से इस सन् का प्रारंभ मानता है. वर्तमान इतिहास लेखक वैर्रो का अनुकरण करते हैं.