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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s8.22

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s8.22

Language
Hindi

c31.s8.22

इस संवत् के साथ जुड़ा हुआ शालिवाहन (सातवाहन) का नाम संस्कृत साहित्य में ई. स. की १४वीं शताब्दी के प्रारंभ१ के आस पास से और शिलालेखादि में पहिले पहिल हरिहर गांव से मिले हुए विजयनगर के यादव राजा बुक्कराय (प्रथम) के शक संवत् १२७६ (ई. स. १३५४) के दानपत्र२ में मिलता है; जिसके पीछे शालिवाहन का नाम लिखने का प्रचार बढ़ता गया. विद्वान् राजा सातवाहन (शालिवाहन) का नाम 'गाथासप्तशती' और 'बृहत्कथा' से साक्षरवर्ग में प्रचलित था अत एव संभव है कि ई. स. की १४वीं शताब्दी के आस पास दक्षिण के विद्वानों ने उत्तरी हिंदुस्तान में चलनेवाले संवत् के साथ जुड़े हुए राजा विक्रम के नाम का अनुकरण कर अपने यहां चलनेवाले 'शक' (शक संवत्) के साथ दक्षिण के राजा शालिवाहन (सातवाहन, हाल) का नाम जोड़ कर 'नृपशालिवाहनशक',३ 'शालिवाहनशक',४ 'शालिवाहनशकवर्ष',५ 'शालिवाहनशकाब्द'६ आदि से इस संवत् का परिचय देना प्रारंभ किया हो.