भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s8.7
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s8.7
- Language
- Hindi
c31.s8.7
संस्कृत साहित्य में इस संवत् के साथ ‘शक’ नाम जुड़ा हुआ (=शककाल) पहिले पहिल३ वराहमिहिर की ‘पंचसिद्धांतिका’ में शक संवत् ४२७४ (ई. स. ५०५) के संबंध में मिलता है; और शक संवत ५०० (ई. स. ५७८) से लगा कर १२६२ (ई. स. १३४०) तक के शिलालेखों और दानपत्रों में ‘शकनृपतिराज्याभिषेकसंवत्सर’५, ‘शकनृपतिसंवत्सर’६, ‘शकनृपसंवत्सर’७, शकनृपकाल’८, शकसंवत्’९, ‘शकवर्ष’१०, ‘शककाल’११, ‘शककालसंवत्सर’१२, ‘शक’१३ और ‘शाक’१४ शब्दों का प्रयोग इस संवत् के वास्ते किया हुआ मिलता है जिससे पाया जाता है कि ई. स. ५०० के आसपास से लगा कर शक संवत् १२६२ (ई. स. १३४०) तक तो यह संवत् किसी शक राजा के राज्याभिषेक से चला हुआ या किसी शक राजा अथवा शकों का चलाया हुआ माना जाता था और उस समय तक शालिवाहन का नाम इसके साथ नहीं जुड़ा था.