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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c4.1

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c4.1

Language
Hindi

c4.1

प्राचीन काल में आर्य जाति विद्या और सभ्यता में सर्वोच्च पद पा चुकी थी और एशिया खंड ही आर्यों की सभ्यता का मूल स्थान था जहांसे बहुधा दुनिया भर में धर्म, विद्या और सभ्यता का प्रचार हुआ. एशिया में भारत, ईरान और असीरिआवाले तथा आफ्रिका में मिसरवाले बड़ी उन्नत दशा को पहुंचे थे, परंतु परिवर्तनशील समय किसी को सर्वदा एक दशा में नहीं रहने देता. अनेक राष्ट्रविप्लव होते होते ईरान, असीरिआ और मिसरवाले तो अपने प्राचीन साहित्य आदि के उत्तराधिकारी न रहे परंतु भारतवर्ष के आर्य लोगों ने वैसी ही अनेक आपत्तियां सहने पर भी अपनी प्राचीन सभ्यता के गौरवरूपी अपने प्राचीन साहित्य को बहुत कुछ बचा रक्खा और विद्या के संबंध में सारे भूमंडल के लोग थोड़े बहुत उनके ऋणी हैं.