भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c4.18
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c4.18
- Language
- Hindi
c4.18
इस प्रकार सरकार अंग्रेज़ी की उदार सहायता, और एशियाटिक सोसाइटियों, देशी राज्यों, साधारण गृहस्थों तथा विद्वानों के श्रम से हमारे यहां के प्राचीन इतिहास की बहुत कुछ सामग्री उपलब्ध हुई है जिससे नंद, मौर्य, ग्रीक, शातकर्णी (आंध्रभृत्य), शक, पार्थिअन, कुशन, क्षत्रप, अभीर, गुप्त, हूण, यौधेय, बैस, लिच्छिवि, परिव्राजक, राजर्षितुल्य, वाकाटक, मुखर (मौखरी), मैत्रक, गुहिल, चापोट्कट (चावड़े), चालुक्य (सोलंकी), प्रतिहार (पड़िहार), परमार, चाहमान (चौहान), राष्ट्रकूट (राठौड़), कच्छपघात (कछवाहा), तोमर (तंवर), कलचुरि (हैहय), त्रैकूटक, चंद्रात्रेय (चंदेल), यादव, गुर्जर, मिहिर, पाल, सेन, पल्लव, चोल, कदंब, शिलार, सेंद्रक, काकतीय, नाग, निकुंभ, बाण, मत्स्य, शालंकायन, शैल, मूषक, चतुर्थवर्ण (रेड्डि) आदि अनेक राजवंशों का बहुत कुछ वृत्तांत, उनकी वंशावलियां एवं कई एक राजाओं का निश्चित समय भी मालूम होता है इतना ही नहीं, किंतु अनेक विद्वानों, धर्माचार्यों, धनाढ्यों, दानी, वीर आदि प्रसिद्ध पुरुषों के नाम, उनके वृत्तांत तथा समय