भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.12
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.12
- Language
- Hindi
c7.12
भोजपत्र२, ताड़पत्र३ या कागज़४ पर लिखे हुए पुस्तक हज़ारों वर्ष रह नहीं सकते, विशेषतः भारतवर्ष के जलवायु में, परंतु पत्थर या धातु पर खुदे हुए अक्षर यत्नपूर्वक रहें और हवा तथा बारिश से बचने पावें तो बहुत समय तक बच सकते हैं। इस देश में जो प्राचीन शिलालेख विशेष संख्या में मिले हैं वे मौर्यवंशी राजा अशोक के समय के, अर्थात् ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दि के हैं, और पाषाण के विशाल स्तंभों अथवा चटानों पर खुदे हुए हैं। ये पेशावर से माहिसोर तक और काठियावाड़ से उड़ीसा तक अर्थात् क़रीब क़रीब सारे भारतवर्ष५ में मिल चुके हैं। इनसे पाया जाता है कि उस समय सारे भारतवर्ष में लिखने का प्रचार भली भांति था, जैसा कि इस समय है। इन लेखों में देशभेद से कितने एक अक्षरों की आकृति में कुछ भिन्नता६ पाई जाती है और किसी किसी अक्षर के कई रूप मिलते हैं; जिससे अनुमान होता है कि उस समय भी लिखने की कला इस देश में नवीन नहीं, किंतु सुदीर्घ काल से चली आती थी।