भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.150
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.150
- Language
- Hindi
c7.150
शतपथ ब्राह्मण के अग्निचयन प्रकरण में हिसाब लगाया है कि ऋग्वेद के अक्षरों से १२-००० बृहती (३६ अक्षर का) छंद प्रजापति ने बनाए अर्थात् ऋग्वेद के कुल अक्षर (१२-००० × ३६=) ४३२००० हुए. इसी तरह यजु के ८००० और साम के ४००० बृहती छंद बनने से उन दोनों के भी ४३२००० अक्षर हुए. इन्हीं अक्षरों से पंक्ति छंद (जिसमें आठ आठ अक्षरों के पांच पद अर्थात् ४० अक्षर होते हैं) बनाने से ऋग्वेद के (४३२०००÷४०=) १०८०० पंक्ति छंद हुए और उतने ही यजु और साम के मिल कर हुए. एक वर्ष के ३६० दिन और एक दिन के ३० मुहूर्त्त होने से वर्ष भर के मुहूर्त्त भी १०८०० होते हैं अर्थात् तीनों वेदों से उतने पंक्ति छंद दुबारा बनते हैं जितने कि वर्ष के मुहूर्त्त होते हैं७.