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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.17

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.17

Language
Hindi

c7.17

अशोक से पूर्व के अभी तक केवल दो छोटे छोटे शिलालेख मिले हैं, जिनमें से एक अजमेर ज़िले के बड़ली७ गांव से मिला है और दूसरा नेपाल की तराई के पिप्रावा नामक स्थान के एक स्तूप के भीतर से मिले हुए पात्र पर, जिसमें बुद्धदेव की अस्थि रक्खी गई थी, खुदा है। इनमें से पहिला एक स्तंभ पर खुदे हुए लेख का टुकड़ा है, जिसकी पहिली पंक्ति में ‘वीर[१]य भगव[त]’ और दूसरी में ‘चतुरासिति व[स]’ खुदा है। इस लेख का ८४ वां वर्ष जैनों के अंतिम तीर्थंकर वीर (महावीर) के निर्वाण संवत् का ८४ वां वर्ष होना चाहिये। यदि यह अनुमान ठीक हो तो यह लेख ई. स. पूर्व ' (५२७-८४=) ४४३ का १ होगा. इसकी लिपि अशोक के लेखों की लिपि से पहिले की प्रतीत होती है. इसमें 'वीराय' का 'वी' अक्षर [Image of Brahmi letter vi / curly character] है. उक्त 'वी' में जो 'ई' की मात्रा का चिन्ह ( है वह न तो अशोक के लेखों में और न उनसे पिछले किसी लेख में मिलता है, अत एव वह चिन्ह अशोक से पूर्व की लिपि का होना चाहिये, जिसका व्यवहार अशोक के समय में मिट कर उसके स्थान में नया चिन्ह [Image of angular bracket or marker] बर्ताव में आने लग गया होगा २.