भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.179
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.179
- Language
- Hindi
c7.179
बोथलिंग कहता है२ कि 'मेरे मत में साहित्य के प्रचार में लिखने का उपयोग नहीं होता था परंतु नये ग्रंथों के बनाने में इसको काम में लेते थे. ग्रंथकार अपना ग्रंथ लिख कर बनाता परंतु फिर उसे या तो स्वयं कंठस्थ कर लेता या औरों को कंठस्थ करा देता. कदाचित् प्राचीन समय में एक बार लिखे ग्रंथ की प्रति नहीं उतारी जाती थी परंतु मूल लिखित प्रति ग्रंथकार के वंश में उसकी पवित्र यादगार की तरह रक्खी जाती और गुप्त रहती थी. यह भी संभव है कि ग्रंथकार अपने ग्रंथ को कंठस्थ करके उसकी प्रति को स्वयं नष्ट कर देता जिससे दूसरे उसका अनुकरण न करें और अपने आप को ब्राह्मण जाति के विरुद्ध काम करने का दोषी न बनना पड़े.'