भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.2
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.2
- Language
- Hindi
c7.2
१ षाण्मासिके तु समये भ्रान्तिः संजायते यतः। धात्राक्षराणि सृष्टानि पत्रारूढान्यतः पुरा॥ ('आन्हिकतत्व' और 'ज्योतिस्तत्व' में वृहस्पति का वचन). नाकरिष्यद्यदि ब्रह्मा लिखितं चक्षुरुत्तमम्। तत्रेयमस्य लोकस्य नाभविष्यत् शुभा गतिः॥ (नारदस्मृति). वृहस्पतिरचित मनु के वार्तिक में भी ऐसा ही लिखा है (से. बु. ई; जिल्द २३, पृ. ३०४); और चीनी यात्री ह्युएन्त्संग, जिसने ई. स. ६२६ से ६४५ तक इस देश की यात्रा की, लिखता है कि 'भारतवासियों की वर्णमाला के अक्षर ब्रह्मा ने बनाये थे और उनके रूप (रूपांतर) पहले से अब तक चले आ रहे हैं' (बी;बु.रे.वे.व; जिल्द १, पृ. ७७).