भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.45
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.45
- Language
- Hindi
c7.45
९ जिस वर्ष बुद्ध का निर्वाण हुआ उसी वर्ष (ई.स. पूर्व ४८७ के आसपास) उनके मुख्य शिष्य काश्यप की इच्छानुसार मगध के राजा अजातशत्रु की सहायता से राजगृह के पास की सप्तपर्ण गुफा के बड़े दालान में बौद्धों का पहिला संघ एकत्र हुआ जिसमें ५०० अर्हत (बड़े दरजे के साधु) उपस्थित थे. वहां पर उपालि ने, जिसको स्वयं बुद्ध ने ‘विनय’ का अद्वितीय ज्ञाता माना था, ‘विनय’ सुनाया, जो बुद्ध का कहा हुआ ‘विनय’ माना गया. बौद्धों के धर्मग्रंथों के तीन विभाग ‘विनय,’ ‘सुत्त’ (सूत्र) और ‘अभिधम्म’ (अभिधर्म) हैं, जिनमें से प्रत्येक को ‘पिटक’ कहते हैं. प्रत्येक पिटक में कई ग्रंथ हैं और तीनों मिलकर ‘त्रिपिटक’ कहलाते हैं. ‘विनय’ में बौद्ध साधुओं के आचार का विषय है. ओल्डनबर्ग के मत में ‘विनय’ के कितने एक अंश ई.स. पूर्व ४०० से पहिले के हैं.