भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.55
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.55
- Language
- Hindi
c7.55
भरहुत के स्तूप के कटहरों पर इक्कीस जातकों के चित्र खुदे हुए हैं और उनपर नाम भी दिए हैं; एक पर तो जातक में से गाथा का एक पाद ज्यों का त्यों खुदा हुआ है. यह स्तूप ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी का है अतएव जातकों का इससे प्राचीन होना तो सिद्ध ही है; परंतु जिन राजाओं और नगरों का उनमें उल्लेख है वे नंद और मौर्यवंशी राजाओं के पहले के हैं और पात्रों के आचार व्यवहार भी बुद्ध के बहुत पहले के जान पड़ते हैं; इससे यह मानना साहस नहीं है कि ई.स. पूर्व की छठी शताब्दी या उससे भी पहले के समाज के चित्र जातकों की कथाओं में अंकित हैं. प्रोफ़ेसर कॉवेल की संपादकत्ता में ५४७ जातकों का अंगरेज़ी भाषांतर ६ जिल्दों में छप कर प्रकाशित हुआ है. मूल डॉक्टर फॉसबॉल् ने रोमन लिपि में प्रकाशित किया है.