भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.60
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.60
- Language
- Hindi
c7.60
काशी के एक राजा ने अपने निकाले हुए पुरोहित को फिर बुलाने के लिये एक गाथा लिख कर पण्ण भेजा और उसपर राजमुद्दिका (राजमुद्रिका) से मोहर की (पुण्णनदी जातक).
पोतलि के राजा अस्सक (अश्मक) के मंत्री नंदिसेन ने एक सासन (शासन) लिख कर दंतपुर के राजा कालिंग का आक्रमण रोका और कालिंग राजा लेख को सुन कर (लेखं सुत्वा) रुक गया (चुल्लकालिंग जातक).
सात राजाओं ने काशी को घेरा देकर राजा ब्रह्मदत्त को पण्ण भेजा कि राज्य छोड़ो या लड़ो. उसके उत्तर में राजा के भाई असदिस (असदृश) ने बाण पर अक्षर (अक्खरानि) खोदे (अच्छिन्दि) और वह बाण ऐसे निशाने से मारा कि उनके भोजनपात्रों पर लगा. उसमें लिखा था कि भाग जाओ नहीं तो मारे जाओगे (असदिस जातक.)
नामी चोर (जैसे आज कल पुलिस के रजिस्टर में 'नंबरी' बदमाश होते हैं) 'लिखितको चोरो,' अर्थात् जिसके बारे में राज की ओर से लिखी हुई आज्ञा निकल चुकी हो, कहलाता था. ऐसे चोर बौद्धसंघ में आ आकर भरती होने लगे, तब बुद्ध ने इस बखेड़े को रोका (महावग्ग १.४३).