भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.64
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.64
- Language
- Hindi
c7.64
१ उपासि के मातापिता ने राजगृह में विचार किया कि बच्चे को क्या काम सिखावें. उन्होंने निश्चय किया कि यद्यपि लेखा, गणना और रूप सिखाने से भविष्य में उसको लाभ होगा परंतु इन तीनों से क्रमशः अंगुली, छाती और आंखों को क्लेश होगा, इससे उन्होंने उसे बौद्ध भिक्खु (श्रमण) बनाना निश्चय किया क्योंकि श्रमण सदाचारी होते हैं, खाने पीने को उन्हें अच्छा मिलता है और सोने को अच्छे बिछौने (महावग्ग १.४६; भिक्खुप्राचित्तिय ६५.१). कलिंग के राजा खारवेल के हाथीगुंफा के लेख में उक्त राजा का लेख, रूप और गणना सीखना लिखा है (ततो लेखरूपगणना व्यवहारविधिविशारदेन सर्व्वविद्यावदातेन.........): ‘हाथीगुंफा ऐंड थ्री अदर इन्स्क्रिप्शन्स.’ भगवानलाल इंद्रजी संपादित, पृ. २२.