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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c8.1

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c8.1

Language
Hindi

c8.1

मौर्यवंशी राजा अशोक के लेखों तथा ई. स. पूर्व की चौथी शताब्दी से लगाकर ई. स. की तीसरी शताब्दी के आसपास तक के कितने एक सिक्कों आदि से पाया जाता है कि उस समय इस देश में दो लिपियां प्रचलित थीं; एक तो नागरी की नांई बाईं तरफ से दाहिनी ओर लिखी जाने वाली सार्वदेशिक, और दूसरी फ़ारसी की तरह दाहिनी ओर से बाईं ओर लिखी जाने वाली एकदेशिक. इन लिपियों के प्राचीन नाम क्या थे इस विषय में ब्राह्मणों के पुस्तकों में तो कुछ भी लिखा नहीं मिलता. जैनों के ‘पण्णवणासूत्र’ और ‘समवायांगसूत्र’ में १८ लिपियों१ के नाम मिलते हैं, जिनमें सब से पहिला नाम ‘बंभी’ (ब्राह्मी) है, और भगवतीसूत्र में ‘बंभी’ (ब्राह्मी) लिपि को नमस्कार करके (नमो बंभीए लिविए) सूत्र का प्रारंभ किया गया है. बौद्धों के संस्कृत पुस्तक ‘ललितविस्तर’२ में ६४ लिपियों३ के नाम मिलते हैं जिनमें सब से पहिला ‘ब्राह्मी’ और दूसरा ‘खरोष्ठी’ हैं. चीन में बौद्ध धर्म का प्रचार होने के पश्चात् ई. स. की पहिली से आठवीं शताब्दी तक हिंदुस्तान से कितने ही बौद्ध श्रमण अपने धर्म के प्रचार के निमित्त समय समय पर चीन में गये और उन्होंने बौद्धों के अनेक संस्कृत और प्राकृत ग्रंथों के चीनी भाषा में अनुवाद किये४ या उस काम में सहायता दी. चीन में