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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c8.127

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c8.127

Language
Hindi

c8.127

तक्षशिला के अरमइक लेख से तथा अंग्रेज़ी के छापे के अक्षरों से ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति बताने में फिनिशिअन की अपेक्षा अधिक सरलता होने पर भी यह नहीं कहा जा सकता कि उनसे ब्राह्मी अक्षर बने हैं. ऐसी दशा में बूलर का मत किसी तरह स्वीकार नहीं हो सकता क्योंकि फिनिशिअन् के गिमेल (ग) और ब्राह्मी के ‘ग’ को छोड़ कर अन्य किसी समान उच्चारण वाले अक्षर में समानता नहीं है. बूलर का सारा यत्न खींचतान ही है. इसीसे बूलर की ‘भारतवर्ष की ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति’ के छपने के बाद ‘बुद्धिस्ट इंडिया’ नामक पुस्तक के कर्ता डॉ. राइस डेविड्ज़ को यह मानना पड़ा कि ‘ब्राह्मी लिपि के अक्षर न तो उत्तरी और न दक्षिणी सेमिटिक अक्षरों से बने हैं’[^१, ऐसे ही ‘एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका’ नामक महान अंग्रेज़ी विश्वकोश में इस विषय में यह लिखा गया कि ‘बूलर का कथन यद्यपि पाण्डित्य और चतुराई से भरा हुआ है तो भी यह मानना पड़ता है कि वह अधिक निश्चय नहीं दिलाता. इस लिपि का उद्भव कहां से हुआ इसका निर्णय निश्चित रूप से करने के पहिले इसके प्राचीन इतिहास के और भी प्रमाणों का ढूंढ़ना आवश्यक है, और ऐसे प्रमाण मिल सकेंगे इसमें कोई संदेह नहीं’.