भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c8.133
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c8.133
- Language
- Hindi
c8.133
१ ई. स. १८६४ में मैंने 'प्राचीनलिपिमाला' का प्रथम संस्करण छापा, जिसकी एक प्रति डॉ. बूलर को भेट की. उसकी पहुंच स्वीकार करने के साथ डॉ. बूलर ने लिखा 'कि तुम ब्राह्मी लिपि को भारतवासियों की निर्माण की हुई स्वतंत्र लिपि मानते हो यह ठीक नहीं. ब्राह्मी लिपि सेमिटिक लिपि से निकली हुई है.' इसके उत्तर में मैंने लिखा कि 'यदि ब्राह्मी और खरोष्ठी दोनों लिपियां एक ही मूल लिपि की शाखें हैं तो ७०० वर्ष के भीतर ही उनमें परस्पर एक भी अक्षर की समानता न रही इसका क्या कारण है सो आप कृपा कर सूचित कीजिये.' परंतु इसका कुछ भी उत्तर वे न दे सके और न अब भी कोई दे सकता है.