भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c8.165
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c8.165
- Language
- Hindi
c8.165
अवशेषों तक अभी वह नहीं पहुंच सका है. अभी तक प्राचीन शिलालेख जो मिले हैं वे ई. स. पूर्व की पांचवीं शताब्दी से पहिले के नहीं हैं, परंतु साहित्य में प्रत्यक्ष या गौण रीति से लेखनकला के जो हवाले मिलते हैं वे बहुत प्राचीन समय तक जाते हैं. उन सब से सिद्ध होता है कि लेखनकला सर्वसाधारण में प्रचलित, एक पुरानी बात थी जिसमें कोई अनोखापन न था. जितने प्रमाण मिले हैं, चाहे प्राचीन शिलालेखों के अक्षरों की शैली, और चाहे साहित्य के उल्लेख, सभी यह दिखाते हैं कि लेखनकला अपनी प्रौढ़ावस्था में थी. उसके आरम्भिक विकास के समय का पता नहीं चलता. ऐसी दशा में यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि ब्राह्मी लिपि का आविष्कार कैसे हुआ और इस परिपक्व रूप में, कि जिसमें ही हम उसे पाते हैं, वह किन किन परिवर्तनों के बाद पहुंची. मिसर आदि में जैसे भावों के संकेतरूप चित्र हुए और वे शब्दों के संकेत हो कर उनसे अक्षरों के संकेत बने, इस तरह यहां भी किसी चित्रलिपि से ब्राह्मी लिपि बनी, या प्रारम्भ से ध्वनि के ही सूचक चिन्ह बना लिये गये, यह कुछ निश्चय के साथ नहीं कहा जा सकता. निश्चय के साथ इतना ही कहा जा सकता है कि इस विषय के प्रमाण जहां तक मिलते हैं वहां तक ब्राह्मी लिपि अपनी प्रौढ़ अवस्था में और पूर्ण व्यवहार में आती हुई मिलती है और उसका किसी बाहरी स्रोत और प्रभाव से निकलना सिद्ध नहीं होता.