Pramāṇa · Search · About · API

भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c8.172

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c8.172

Language
Hindi

c8.172

भी अनार्यों से ही लिये गये? 'ट'१, 'ड'२, 'ढ'३ और 'ण'४ से प्रारंभ होने वाले बहुत से धातु हैं, और जिनमें मूर्धन्य वर्णों का प्रयोग हुआ हो ऐसे हज़ारहा शब्द वैदिक साहित्य में पाये जाते हैं. ग्रीक आर्यों की भाषा में 'ट' और 'ड' ही हैं, 'त' और 'द' का सर्वथा अभाव है और सेमिटिक् अनार्यों की लिपियों में मूर्धन्य वर्णों का सर्वथा अभाव पाया जाता है (देखो पृ. २३ में छुपा हुआ नक्शा); इसी से ग्रीकों ने फ़िनिशियन् अक्षर 'ताव' ('त' का सूचक) से टाओ ('ट'), और दालेथ ('द') से डेल्टा ('ड') बनाया. ऐसी दशा में बाबू जगन्मोहनवर्मा का यह दूसरा कथन भी आदरणीय नहीं हो सकता.