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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c9.3

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c9.3

Language
Hindi

c9.3

मौर्यवंशी राजा अशोक के अनेक लेखों६ में से केवल शहबाज़गढ़ी और मान्सेरा के चट्टानों पर खुदे हुए लेख खरोष्ठी लिपि में हैं, जिनसे पाया जाता है कि यह लिपि ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी में केवल भारतवर्ष के उत्तरी-पश्चिमी सीमांत प्रदेश के आस पास, अर्थात् पंजाब के गांधार७ प्रदेश में, प्रचलित थी. अशोक से पूर्व का इस लिपि का कोई शिलालेख अब तक नहीं मिला, परंतु ईरानियों के कितने एक चांदी के मोटे सिक्कों८ पर ब्राह्मी या खरोष्ठी लिपि के एक एक अक्षर का ठप्पा९ लगा हुआ मिलता है, जिससे अनुमान होता है कि पंजाब की तरफ़ चलने वाले ये ईरानी सिक्के संभवतः सिकंदर से पूर्व के अर्थात् ई. स. पूर्व की चौथी शताब्दी के हों; क्योंकि सिकंदर के विजय से ईरानियों का अधिकार पंजाब पर से उठ गया था.