भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c9.48
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c9.48
- Language
- Hindi
c9.48
अरमइक लिपि में केवल २२ अक्षर होने तथा स्वरों की अपूर्णता और उनमें ह्रस्व दीर्घ का भेद न होने एवं स्वरों की मात्राओं का सर्वथा अभाव होने से वह यहां की भाषा के लिये सर्वथा उपयुक्त न थी तो भी राजकीय लिपि होने के कारण यहां वालों में से किसी ने ई. स. पूर्व की पांचवीं शताब्दी के आसपास उसके अक्षरों की संख्या बढ़ा कर, कितने एक को आवश्यकता के अनुसार बदल तथा स्वरों की मात्राओं की योजना कर उसपर से मामूली पढ़े लिखे लोगों, व्यापारियों तथा अहल्कारों के लिये काम चलाऊ खरोष्ठी लिपि बना दी हो. संभव है कि इसका निर्माता चीन वालों के लेखानुसार खरोष्ठ नामक आचार्य६ (ब्राह्मण) हो, जिसके नाम पर से इस लिपि का नाम खरोष्ठी हुआ, और यह भी संभव है कि तक्षशिला जैसे गांधार के किसी प्राचीन विद्यापीठ में इसका प्रादुर्भाव हुआ हो.